पंजाब में ड्रग्स केस

22 दिसंबर, 2021 03:50 PM

पंजाब में ड्रग्स हर चुनाव में मुद्दा बनती है, पांच वर्ष पहले हुए चुनाव में भी कांग्रेस सरकार ने राज्य में नशे और इसके सौदागरों को जड़ से खत्म करने के आह्वान के साथ चुनाव लड़ा था और अब जब अगले वर्ष फिर विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, तब फिर से इस मुद्दे को उछाल दिया गया है। बीते दिनों मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से नशे पर नकेल के लिए सवाल किए गए थे, तो उन्होंने कहा था कि कुछ दिनों में इस संबंध में कार्रवाई होते देखिएगा। हालांकि अब पूर्व अकाली मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ मोहाली स्टेट क्राइम सेल में केस दर्ज होने के बाद सरकार की ओर से समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर अपनी प्रतिबद्धता को जाहिर किया गया है। इन विज्ञापनों में मुख्यमंत्री चन्नी के हवाले से कहा गया है कि सरकार ने नशों के सौदागरों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई कर दी है। मुख्यमंत्री का दावा है कि जो ऐलान किया, वह लागू किया गया है। जाहिर है, पंजाब में नशा तस्करी और इस जुर्म पर तालाबंदी करने के लिए सरकार की ओर से सख्त कदम उठाए जाने जरूरी हैं, लेकिन एक विरोधी पार्टी के नेता पर केस दर्ज कर सरकार अगर यह दावा कर रही है कि वह नशों की अलामत के मुकम्मल खात्मे के लिए प्रतिबद्ध है, तो यह बहुत जल्दबाजी होगी। इस मामले के बाद राज्य की सियासत में भूचाल आता दिख रहा है। कांग्रेस एकतरफ है और सभी विपक्षी दल दूसरी ओर। विपक्षियों का कहना है कि सरकार ने चुनावी फायदे के लिए यह कार्रवाई अंजाम दी है, लेकिन आगे जाकर इसमें कुछ नहीं निकलेगा। अकाली दल ने तो इसे बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया है।
मजीठिया के खिलाफ यह केस एसटीएफ की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज किया बताया गया है। केस दर्ज होने के बाद सरकार ने एसआईटी का गठन किया है, जोकि आरोपों की जांच करेगी। मजीठिया के खिलाफ 49 पेज की एफआईआर दर्ज की गई है। सबसे बड़ा आरोप यह है कि मजीठिया ने अपनी सम्पत्ति और गाडिय़ों के जरिए ड्रग तस्करी में मदद की, वहीं उन्होंने इसे नशे को बांटने और बेचने के काम को फाइनेंस किया और ड्रग तस्करी में पूरी साजिश रची। जाहिर है, यह गंभीर आरोप हैं, जिनका निष्कर्ष क्या निकलेगा यह समय बताएगा, लेकिन अभी छह महीने पहले तक तत्कालीन कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार ने इस संबंध में क्यों नहीं सोचा, यह भी एक सवाल है। क्या यह आरोप लगाया जाए कि उस समय के मुख्यमंत्री ने अकाली दल के नेताओं के साथ नरम रुख रखा। राजनीति में कुछ भी निश्चित नहीं है, लेकिन इतना तय है कि कैप्टन अमरिंदर को इसका जरा सा भी अहसास नहीं रहा होगा कि वे अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएंगे। अगर उन्हें इसका इल्म हो जाता तो वे भी शायद ऐसे ही किसी केस को दर्ज करने को पुलिस को कहते। यही वजह है कि अब उनका बयान आ रहा है कि मौजूदा सरकार के द्वारा दुश्मनी निकालने के लिए कार्रवाई की जा रही है। सरकार ने बगैर किसी सबूत के मजीठिया के खिलाफ केस दर्ज किया है, अगर सबूत होते तो मैं निश्चित रूप से केस दर्ज करवाता। हालांकि कैप्टन अमरिंदर सिंह से भी यह पूछा जाना चाहिए कि अगर संदेह था तो उनके कार्यकाल में क्या जांच हुई और क्या सबूत जुटाए गए। अगर सबूत नहीं हैं तो फिर आरोप क्यों लगे?
बेशक, कांग्रेस सरकार का यह कदम राज्य की जनता को नशाखोरी पर लगाम लगाने के प्रति संजीदा होने का प्रमाण देता है। लेकिन इस दौरान एक ही नेता पर कार्रवाई होना इसे राजनीति से प्रेरित होना भी साबित करता है। राज्य में ड्रग्स, अवैध शराब के बड़े जखीरे मिलते रहे हैं, गांव-देहात,शहर हर जगह ड्रग्स उपलब्ध हो जाती है, वह कहां से आती है और कौन उसे सप्लाई करता है। स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी रहती होगी, बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं होती। सबकुछ यथावत चलता रहता है, अब चुनाव नजदीक हैं और सरकार ने अपना सबसे बड़ा हथियार आजमा लिया है, तब राज्य की जनता के मन में एक राय यह भी है कि आखिर कांग्रेस सरकार ने इतना वक्त क्यों ले लिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू का कहना है कि वे पिछले साढ़े पांच साल से यह लड़ाई लड़ रहे हैं। सिद्धू खुद भी सरकार का हिस्सा रहे, लेकिन अब वे पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर पर आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने चार साल तक मजीठिया के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। जाहिर है, इस समय राज्य में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा विरोधी अकाली दल ही है, इस संजीदा मुद्दे को उठाकर मौजूदा सरकार ने भी खानापूर्ति करने की ही सोची है। यह लड़ाई व्यक्तिगत ज्यादा जान पड़ रही है। आम आदमी पार्टी की ओर से कांग्रेस पर आरोप लगाया गया है कि मजीठिया पर केस दर्ज होना केवल चुनावी स्टंट है, आप का यह आरोप राजनीतिक बयानों की रवायत है कि मुख्यमंत्री चन्नी और अकाली दल प्रधान सुखबीर बादल के बीच डील हुई है। सरकार चुनावी फायदे के लिए बेहद कमजोर आधार पर मजीठिया पर केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करने का ड्रामा करेगी। आप का यह बयान इसलिए वाजिब लगता है, क्योंकि मजीठिया की गिरफ्तारी प्रदेश की सियासत में तूफाल लाएगी। उस समय अकाली दल इसका शोर मचाने से पीछे नहीं रहेगा कि राजनीतिक रंजिश के लिए मुख्यमंत्री चन्नी ने जानबूझ कर यह केस दर्ज कराया है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के हवाले से बयान भी आया है कि मुख्यमंत्री का काम बदलाखोरी नहीं, बल्कि जनसेवा करना होता है। अकाली दल जेलों या केसों से नहीं डरता।
गौर होकि मुख्यमंत्री चन्नी ने प्रदेश की जनता से इस मामले में साथ देने का आह्वान किया है। उनका आह्वान जायज भी है, क्योंकि घुन्न की तरह प्रदेश की युवा पीढ़ी को खा रहे ड्रग्स रैकेट पर शिकंजा कसा जाना जरूरी है, लेकिन फिर वही सवाल सामने आता है कि सरकार इस आरोप से कैसे बचेगी कि यह कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से नहीं की गई है और यह कोई चुनावी स्टंट भी नहीं है।

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