BREAKING
• punjab university छात्र संघ चुनाव में लगातार दूसरी बार ABVP की जीत के मायने चकित करते हैं • नेता विपक्ष राहुल गांधी को क्या दलित होने की पीड़ा का पता है? क्या दलितों पर राजनीति कभी बंद होगी • क्या सच में मनुस्मृति एक पिंजड़ा है, जिसे तोड़ने का आह्वान राहुल गांधी कर रहे हैं • राजस्थान सरकार के ​शिक्षा मंत्री बताएंगे कि ग्रामीणों ने बचा क्या लिया - टीन की छत के नीचे चल रहे एक तबेले वाले स्कूल को, क्या ऐसे स्कूलों से ही हम वि​कसित बनेंगे • 'आ​खिर माहौल को सुधारने' के लिए पूर्व पीएम शेख हसीना की वापसी पर ही क्यों अड़ा है बांग्लादेश • young india : देश की युवा शक्ति को अपनी ताकत का हो चुका अहसास, 2 करोड़ से अ​धिक युवा मतदाता ही अब बनेंगे भाग्यविधाता

World

पाकिस्तान के रक्षा बजट पर अमेरिकी रिपोर्ट में उठे सवालों का जवाब जनता को ही मांगना चा​हिए

इस आशंका से भी कौन इनकार कर सकता है कि आईएसआई भारत में उन लोगों की तलाश कर रही है, जोकि बिक सकें और भारत की सुरक्षा में सेंध लगा सकें। अपने रक्षा बजट में बढ़ोतरी कर पाक की सेना और खुफिया एजेंसी ऐसे गद्दारों पर ही खर्च कर रही है। वास्तव में पाकिस्तान को मलाल है कि ऑपरेशन सिंदूर में उसे शर्मनाक शिकस्त कैसे मिल गई। जाहिर है, उसका एकमात्र टारगेट भारत में अशांति पैदा करना और आतंक फैलाना है।

रूस, यूक्रेन में युद्ध से क्या बाकी दुनिया खुद को दूर रख पाएगी

अमेरिका की इस मामले में मौजूदगी इसका परिचायक है कि वह अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ अपने मिशन की विफलता से घटी प्रतिष्ठा को और कम नहीं होने देना चाहता, क्योंकि इस समय उसने पैर पीछे खींचे तो दुनिया की सरदारी का उसका ताज हमेशा के लिए छिन जाएगा और रूस बढ़त हासिल कर लेगा।

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के पंडाल में एक मुस्लिम युवक ने ही रखी थी कुरान

बांग्लादेश हिंदू एकता परिषद ने एक बयान में कहा गया है कि कोमिला में नानुआ दिघी में पूजा मंडप पर स्थानीय लोगों के बीच कुरान के अपमान की अफवाह फैलाने के बाद हमला किया गया था। कोमिला के अलावा चांदपुर के हाजीगंज, चट्टोग्राम के बंशखली और कॉक्स बाजार के पेकुआ के मंदिरों से भी हिंसा की घटनाएं सामने आई।

शेख हसीना की नसीहत : भारत में ऐसा कुछ नहीं होना चाहिए जिससे हमारा मुल्क प्रभावित हो

शेख हसीना ने कहा, धर्म व्यक्तिगत होता है जबकि त्योहार सबके लिए होता है और हम सभी उत्सव साथ मिलकर मनाते हैं। लेकिन कुछ लोग धर्मांध होते हैं और ऐसे लोग हमेशा सांप्रदायिक टकराव पैदा करते हैं। ऐसे लोग केवल मुस्लिम समुदाय में ही नहीं हैं बल्कि दूसरे धर्मों में भी हैं।

ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत की व्यापक रणनीतिक साझेदारी में जुड़ा एक और अध्याय

दोनों नेताओं ने इस दौरान पिछले शिखर सम्मेलन के बाद हुई प्रगति की समीक्षा की, जो जून 2020 में ऑनलाइन हुआ था। उन्होंने दोनों पक्षों के पारस्परिक हित के लिए अपनी घनिष्ठ साझेदारी और सहयोग जारी रखने का संकल्प भी लिया।

काबुल में हक्कानी नेटवर्क के जरिए आईएसआई चल रही अपनी चाल

हक्कानी नेटवर्क इस समय पूरी तरह से आईएसआई के इशारों पर चल रहा है। ऐसे में विरोधी गुट के नेता काबुल छोडक़र तालिबान की जन्मस्थली कंधार में बैठे हुए हैं।

 

अभी से तालिबान भारत की उपेक्षा कर रहा है तो इसका अर्थ है कि उसके इरादे सही नहीं हैं

 वैसे, अफगानिस्तान में तालिबान के सरकार गठन के दावे कितने वाजिब हैं, यह देश के अंदर चल रहे नरसंहार की खबरों से मालूम हो जाता है। दुनियाभर का मीडिया अब अफगानिस्तान में पैर रखते हुए कांप रहा है, जिन देशों के साथ तालिबान के अच्छे रिश्ते हैं, वहां का मीडिया सच दिखाने से आनाकानी कर रहा है।

अफगानिस्तान की समावेशी सरकार का कौन होगा अगवा?

तालिबान ने पहले ही कहा है कि उसकी सरकार इस्लामिक सरकार होगी और सरकार के ऐलान में अभी कुछ वक्त लग सकता है। तालिबान के ज्यादातर नेता फिलहाल कंधार में हैं और सरकार के गठन को लेकर उनकी बातचीत जारी है।

अफगानिस्तान पर भारत अभी वेट एंड वॉच की स्थिति में

सरकार ने बताया कि आज भी 35 लोगों को काबुल से भारत लाया गया है। संसदीय सौंध में आयोजित इस बैठक में जयशंकर के अलावा राज्यसभा के नेता और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल तथा संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी भी मौजूद थे। 

वियतनाम युद्ध की तरह पीठ दिखा रहा अमेरिका, खुद अपने देश में राष्ट्रपति बाइडेन की हो रही आलोचना

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के बेहद कट्टर प्रतिद्वंदी और रिपब्लिकन सीनेटर मिच मैककोनेल सहित कई अमेरिकी सांसदों ने अफगानिस्तान में सैनिकों की वापस की तुलना वियतनाम युद्ध के आखिर में वर्ष 1975 में साइगॉन से दबे पांव वापसी से की है। 

अफगानिस्तान में तालिबान हुआ अपने मंसूबों में कामयाब, गनी गद्दी छोड़ने को तैयार

  •  तालिबान के लड़ाके राजधानी काबूल तक पहुंच चुके हैं और अब इस कट्टर इस्लामिक संगठन के हाथ में सत्ता का आधिकारिक रूप से ऐलान ही बचा है। एजेंसियों के मुताबिक मौजूदा राष्ट्रपति अशरफ गनी शांतिपूर्वक तरीके से तालिबान के हाथों में सत्ता सौंपने को तैयार हैं।
Advertisement