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राष्ट्रीय

राजस्थान सरकार के ​शिक्षा मंत्री बताएंगे कि ग्रामीणों ने बचा क्या लिया - टीन की छत के नीचे चल रहे एक तबेले वाले स्कूल को, क्या ऐसे स्कूलों से ही हम वि​कसित बनेंगे

जयपुर में कॉकरोच जनता पार्टी के पदाधिकारियों और समर्थकों के साथ जो हुआ, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है, देश में ​शिक्षा, स्वास्थ्य और पीने का पानी, सड़क, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं प्राथमिकता हैं और इन्हें सुलभ होना ही चाहिए।

22 अगस्त, 2026 02:44 PM
CJP: जयपुर के सरकारी स्कूल को देखने गई सीजेपी की टीम पर हुआ हमला बेहद निंदनीय और शर्मनाक है। सांकेतिक फोटो एआई निर्मित

CJP ACTIVISTS ASSAULTED IN RAJASTHAN :  राजस्थान में आम कथन है कि पधारो म्हारो देस। ऐसा आगंतुक के स्वागतभाव में कहा जाता है। हालांकि जयपुर के शिवदासपुरा के रामपुरा स्थित कंवरपुरा राजकीय प्राथमिक पाठशाला को देखने पहुंचे सीजेपी यानी कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ ग्रामीणों ने जो किया, वह किसी भी तरह से उचित नहीं कहा जा सकता। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि राज्य सरकार के शिक्षा मंत्री कह रहे हैं कि ग्रामीणों ने अपने स्कूल को बचा लिया। पूछा जाना चाहिए कि आखिर किससे क्या बचा लिया। एक टीन की छत जोकि तबेले में चल रही है।

आखिर क्यों छिपा रहे थे ग्रामीण 

आखिर इसमें क्या छिपाने की बात है कि एक सरकारी स्कूल को कोई देखकर उसकी स्थिति देश को दिखाना चाहता है। लेकिन ग्रामीण हैं या फिर किसी पार्टी विशेष के कार्यकर्ता कि उन्हें वही स्थिति प्रिय है और उसके लिए वे किसी के भी साथ भिड़ जाएंगे, उनके साथ मारपीट करेंगे, गाड़ियों के शीशे तोड़ेंगे और उन्हें गांव से खदेड़ देंगे। जयपुर में कॉकरोच जनता पार्टी के पदाधिकारियों और समर्थकों के साथ जो हुआ, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। यह आखिर किस प्रकार स्वीकार्य हो सकता है कि राज्य के शिक्षा मंत्री ग्रामीणों को बधाई दे रहे हैं कि उन्होंने स्कूल की सुरक्षा की है, उन्हें बधाई। जबकि यह सच है कि देशभर में ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्कूलों की स्थिति हर तरह से दयनीय है। कहीं छत नहीं है, तो कहीं टॉयलेट का प्रबंध नहीं। अगर यह है तो फिर छात्राओं के लिए अलग से समुचित व्यवस्था नहीं मिलेगी। स्टाफ नहीं मिलेगा, पीने के पानी का संकट होगा या फिर सफाई नहीं।

सरकारी स्कूलों की है दयनीय स्थिति 

बरसों से यह देखा जाता रहा है कि सरकारी स्कूलों की प्रणाली हमेशा सवालों के घेरे में रही है। तमाम राज्यों में यही स्थिति है, इस बारे में मीडिया सवाल उठाता है, बौद्धिक वर्ग इस बारे में प्रश्न करता है। चुनाव के वक्त उम्मीदवारों से इसकी मांग की जाती है लेकिन चुनाव के बाद राजनीतिक दल भूल जाते हैं। यह पहली प्राथमिकता होनी चाहिए कि शिक्षा व्यवस्था को समुचित किया जाए। पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार ने सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए व्यापक काम किया है, वहीं हरियाणा सरकार ने भी इस दिशा में प्रभावी कदम उठाए हैं। बावजूद इसके तमाम जगह ऐसी शिकायतें मिल ही जाएंगी, जब स्कूलों में यथोचित संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। अनेक जगह बच्चे फर्श पर बैठकर पढ़ते हैं, जबकि देश अब मंगल पर यान उतारने की तैयारी में है। हम देश को साल 2047 तक विकसित बनाने का संकल्प रखते हैं, लेकिन हमारे गांव-देहात के स्कूल अब भी आजादी के बाद के दौर में ही संचालित हो रहे हैं।

 

कॉकरोच जनता पार्टी ने क्या गलत किया

 कॉकरोच जनता पार्टी के पदाधिकारियों के इस प्रयास में क्या गलत हो सकता है कि वे एक स्कूल की स्थिति को सबके सम्मुख लाकर राजस्थान में शिक्षा के हालात प्रदर्शित करना चाहते हैं। जयपुर के जिस स्कूल को लेकर यह हंगामा हुआ, उसके बारे में बताया गया है कि यहां छत लोहे के एंगल पर टिकी है, स्कूल को एक पशुओं के बाड़े में शिफ्ट कर दिया गया है और बच्चे टीन की शेड के नीचे पढ़ रहे हैं। यहां पर पशुओं के लिए चारा भरा है और दीवारों से ईंटें निकल रही हैं। आखिर राज्य सरकार बताएगी कि जब इन कार्यकर्ताओं ने इस पर ध्यान दिया है, जिन्होंने कुछ दिन पहले ही अपना काम शुरू किया है, तब सरकार क्यों नहीं अब तक ऐसे स्कूल की हालत सुधार पाई।  

 

क्योंकि गरीबाें के बच्चे पढ़ते हैं इन स्कूलों में 

क्या उस स्कूल जैसी जगह पर गरीब अभिभावकों के बच्चे पढ़ते हैं, इसलिए इस पर ध्यान नहीं दिया गया। वहीं राज्य सरकार के मंत्री का यह बयान भी विचित्र है कि जो कार्यकर्ता वहां पर पहुंचे, उनके पास सरिए-आरी थी। निश्चित रूप से देश में जब जंतर-मंतर पर कोई धरने पर बैठता है तो सरकार उससे नाराज नजर आती है, क्योंकि उन्होंने सवाल उठाए होते हैं। कौन है जोकि सवालों से खुश होता हो। बीते दिनों भी यही हुआ था, जब युवाओं ने पेपर लीक को लेकर सरकार पर कार्रवाई का दबाव बनाया। अब यह जांच का विषय हो सकता है कि आखिर गांव में झगड़े की शुरुआत कैसे हुई, लेकिन बेहद अशोभनीय है कि ग्रामीणों ने युवाओं जिनमें युवतियां भी शामिल थी, के साथ दुव्यर्वहार किया।

तो जताना चाहिए था युवाओं का आभार 

होना तो यह चाहिए था कि उन युवाओं का आभार जताया जाता कि उनकी वजह से ही सही अब सरकारी स्कूल के हालात राज्य सरकार और देश के सामने आएंगे। वैसे भी राजस्थान में कहा जाता है कि पधारो म्हारो देश। तो आपके राज्य में कोई आएगा तो उसका स्वागत इस प्रकार होगा। राज्य सरकार को चाहिए कि इस मामले की यथोचित जांच करवाए, वहीं यह भी जरूरी है कि युवा कांग्रेस एवं अन्य सरकारों के द्वारा शासित राज्यों में भी सरकारी संसाधनों की स्थिति की जांच करें, इससे निष्पक्षता कायम रहेगी और पक्षपात के आरोप नहीं लगेंगे।

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