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राष्ट्रीय

पाकिस्तान के रक्षा बजट पर अमेरिकी रिपोर्ट में उठे सवालों का जवाब जनता को ही मांगना चा​हिए

जिस देश की जनता आटा-दाल-चावल जैसे खाद्य पदार्थों के लिए तरस रही हो, वहां की सरकार के लिए हथियारों को खरीदने को प्राथमिकता देना हास्यास्पद

14 अगस्त, 2026 12:33 PM
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ एवं आर्मी चीफ मुनीर। फोटो स्त्रोत एआई

Pakistan news : ऑपरेशन सिंदूर में मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान ने जिस प्रकार अपने रक्षा बजट में बढ़ोतरी शुरू की है और चीन जैसे परंपरागत भारत विरोधी देश से हथियारों की खरीद को बढ़ाया है, वह गंभीर मामला है। पाक इस समय अफगानिस्तान से उलझा हुआ है, वहीं भारत के प्रति उसकी तैयारियों का खुलासा भी हो रहा है।

हालांकि जिस देश की जनता आटा-दाल-चावल जैसे खाद्य पदार्थों के लिए तरस रही हो, वहां की सरकार के लिए हथियारों को खरीदने को प्राथमिकता देना हास्यास्पद है। दरअसल, अमेरिका की राजकोषीय पादर्शिता रिपोर्ट में पाक के सैन्य खर्च की जवाबदेही पर सवाल उठाए गए हैं और यहां तक कहा गया है कि पाक ने सैन्य बजट पर पर्याप्त संसदीय व नागरिक निगरानी नहीं हो रही। इस रिपोर्ट में बांग्लादेश के बजट में भी अनियमितता पाई गई हैं, वहीं भारत संबंधी रिपोर्ट मानकों पर खरी उतरी है।

   गौरतलब है कि पाकिस्तान का रक्षा बजट बीते तीन साल के अंदर 41 फीसदी तक बढ़ चुका है। वहीं दूसरी तरफ यहां बीते सात वर्षों में गरीबी की दर सात फीसदी तक बढ़ चुकी है। बीते दिनों ऐसी रपट आम थी जिनमें बताया गया था कि पाकिस्तान में किस प्रकार खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं और आम जनता इन चीजों को हासिल करने के लिए लूटमार कर रही है। इस बीच अनेक बार यह भी सामने आ चुका है कि पाकिस्तान के हुक्मरान कर्ज के लिए रूस, चीन और अमेरिका समेत दूसरे देशों के दरवाजों पर दस्तक देने में जुटे हैं।

हालांकि ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद जैसे हालात बदल गए हैं और पाकिस्तान को कहीं से गुप-चुप इतना पैसा मिल रहा है कि वह अब उसका इस्तेमाल अपनी सैन्य ताकत को बढ़ाने में कर रहा है। जाहिर है, अमेरिका का दोगलापन पूरी दुनिया जानती है, एक तरफ वह ऐसी रिपोर्ट तैयार करता है, जिसमें किसी देश के अंदर खामी का विवरण होता है, लेकिन अंदरखाने उसकी सरकार संबंधित देश को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने में लगी होती है।

   मालूम हो, इससे पहले अमेरिकी संसद के शोध संस्थान सीआरएस की एक रिपोर्ट के हवाले से सामने आया था कि पाकिस्तान में आतंकी संगठनों की कारगुजारी फिर से जोर पकड़ रही है जोकि भारत के लिए चुनौती है। इस रपट में बताया गया था कि पाक में भारत के खिलाफ आतंकी संगठन फिर से सक्रिय हो गए हैं। पाक में रहकर ये आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर में आतंकी वारदातों को अंजाम देने की तैयारी में हैं।

भारत का पहले दिन से यह दावा है कि पाकिस्तान, जम्मू-कश्मीर समेत देश के कई राज्यों में आतंकवादी गतिविधियों के द्वारा दहशत फैला रहा है और उसकी वजह से अबतक हजारों की तादाद में निर्दोष लोगों की जानें जा चुकी हैं। पहलगाम हमले के बाद घाटी में बीते दिनों तीन श्रमिकों की हत्या कर दी गई थी और देश में तमाम जगह आतंकी हमलों की आशंका भी जताई गई है। आखिर अमेरिका समेत बाकी देशों को जब यह मालूम है कि पाक आतंकियों को प्रश्रय दे रहा है, तब भी उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही।

यानी पाक को अपने फायदे के लिए तमाम देशों के द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है। उसका सबसे बड़ा हथियार सप्लायर चीन बना है, जिसने बीते पांच वर्षों में खरीदारी को 66 फीसदी तक बढ़ा दिया है। इसके बाद क्या इसमें संशय रह जाता है कि चीन से मिले हथियारों और गोला बारूद का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों में नहीं हो रहा। भारत में जितने भी आतंकी हमले हुए हैं, उनमें पाक प्रशिक्षित आतंकी शुमार रहे हैं और उन्हें मिले हथियार भी पाक सेना की ओर से मुहैया कराए गए हैं, जिनकी खरीदारी चीन और अमेरिका जैसे देशों से होती है।

   इस आशंका से भी कौन इनकार कर सकता है कि आईएसआई भारत में उन लोगों की तलाश कर रही है, जोकि बिक सकें और भारत की सुरक्षा में सेंध लगा सकें। अपने रक्षा बजट में बढ़ोतरी कर पाक की सेना और खुफिया एजेंसी ऐसे गद्दारों पर ही खर्च कर रही है। वास्तव में पाकिस्तान को मलाल है कि ऑपरेशन सिंदूर में उसे शर्मनाक शिकस्त कैसे मिल गई। जाहिर है, उसका एकमात्र टारगेट भारत में अशांति पैदा करना और आतंक फैलाना है। ऐसा करके वह भारत की ओर से की जाने वाली सैन्य कार्रवाई से मुकाबले के लिए अपने रक्षा बजट को बढ़ा रहा है। अमेरिका को पाक सरकार की ऐसी संदिग्ध गतिविधियों पर महज रिपोर्ट देने की बजाय यह सुनिश्चित करना चाहिए कि  पाक सरकार अपनी जनता के कल्याण के लिए भी काम और खर्च करे।

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