BREAKING
• punjab university छात्र संघ चुनाव में लगातार दूसरी बार ABVP की जीत के मायने चकित करते हैं • नेता विपक्ष राहुल गांधी को क्या दलित होने की पीड़ा का पता है? क्या दलितों पर राजनीति कभी बंद होगी • क्या सच में मनुस्मृति एक पिंजड़ा है, जिसे तोड़ने का आह्वान राहुल गांधी कर रहे हैं • राजस्थान सरकार के ​शिक्षा मंत्री बताएंगे कि ग्रामीणों ने बचा क्या लिया - टीन की छत के नीचे चल रहे एक तबेले वाले स्कूल को, क्या ऐसे स्कूलों से ही हम वि​कसित बनेंगे • 'आ​खिर माहौल को सुधारने' के लिए पूर्व पीएम शेख हसीना की वापसी पर ही क्यों अड़ा है बांग्लादेश • young india : देश की युवा शक्ति को अपनी ताकत का हो चुका अहसास, 2 करोड़ से अ​धिक युवा मतदाता ही अब बनेंगे भाग्यविधाता

राष्ट्रीय

1984 के सिख विरोधी दंगें : तो जगदीश टाइटलर ने यह कहा था कि मार डालो इन्हें, हमारी मां को इन्होंने मारा है...

सीबीआई ने अब आरोपी जगदीश टाइटलर के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दायर किया है, जिसमें एक गवाह का कहना है कि उसने टाइटलर को दंगा भड़काते देखा था

06 अगस्त, 2023 02:17 PM
84 के सिख विरोधी दंगों की एक तस्वीर। फोटो साभार सोशल मीडिया

Anti sikh riots: चंडीगढ़ . साल 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या एवं उसके बाद देशभर में हुए दंगों के गुनाहगार कौन हैं, यह अब तक साफ नहीं हो पाया है। बेशक, इंदिरा गांधी के हत्यारों को सजा मिल चुकी है, लेकिन उन निर्दोष सिखों के परिवारों को न्याय कब मिलेगा जोकि इन दुर्दांत दंगों में मौत के घाट उतार दिए गए। तब से सरकारें आई हैं, गई हैं, नेता बदलते रहे हैं। खुद कांग्रेस ने अनेक वर्षों तक राज किया है, राज्यों में उसकी सरकारें रही हैं, हैं और आगे भी कायम हो रही हैं। लेकिन इस दौरान यह राज कभी नहीं खुल पाया कि आखिर 84 के दंगों के गुनाहगार कौन हैं। क्या उन्हें नाजमद कर उनको सजा नहीं मिलनी चाहिए।

 

दिल्ली में सिख विरोधी दंगों में एक नाम हमेशा सुर्खियों में रहा है, वह नाम जगदीश टाइटलर का है। अपनी जवानी के दिनों में कांग्रेस और इंदिरा गांधी के विश्वस्त नेताओं में शुमार रहे जगदीश टाइटलर दंगों में सिखों की हत्या का आरोप झेल रहे हैं। अब उन्हें जमानत मिल चुकी है, बरसों तक जेल की सलाखों के पीछे रहे टाइटलर दंगाइयों का वह चेहरा रहे हैं, जिसके बारे में सिख दंगा पीडि़त चीख-चीख कर गवाही देते आए हैं, लेकिन कुछ नहीं हुआ। क्या यह भारत की न्यायपालिका का सबसे संवेदनहीन पक्ष नहीं है कि यह मालूम होते हुए कि किसी के उकसावे पर ही दंगाइयों ने गुरुघरों को फूंक डाला था, सिख लोगों की हत्याएं की थी, उनके घरों, प्रतिष्ठानों को जला दिया गया था, दोषियों को कोई सजा नहीं मिल सकी है।

 

अब इस मामले में नया घटनाक्रम यह है कि सीबीआई ने जगदीश टाइटलर के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दाखिल किया है, इसमें उन पर गंभीरतम आरोप दोहराए गए हैं। इस दौरान एक गवाह ने कहा है कि 1 नवंबर 1984 को दिल्ली में गुरुद्वारा पुल बंगश के सामने एक सफेद अंबेसडर कार से टाइटलर ने बाहर आकर चिल्लाते हुए कहा था कि सिखों को मार डालो, उन्होंने हमारी मां (इंदिरा गांधी) को मार डाला है। मालूम हो, इंदिरा गांधी की हत्या के एक दिन बाद पुल बंगश के क्षेत्र में तीन लोगों की हत्या करके गुरुद्वारे में आग लगा दी गई थी। दरअसल, इस तरह के आरोप आरंभ से लगते आए हैं और इस मामले में आरोप पत्र बदलते रहे हैं। जांच एजेंसी ने आरोपियों की आवाज के नमूने लिए हैं, लेकिन उनका शुरू से यह कहना है कि वे निर्दोष हैं और उन्होंने कुछ नहीं किया है।

 

क्या यह न्यायप्रणाली का मजाक नहीं है कि हत्या करके या करवा कर भी कोई खुद को निर्दोष ठहराता है और धड़ल्ले से उन आरोपों को गलत ठहराता है जोकि पीडि़तों की पीढिय़ां लगाती आ रही हैं। यह पूरा मामला राजनीतिक संवेदनहीनता का भी परिचायक है। आजादी के समय भारत-पाक बंटवारे में लोगों ने जो दंश झेला था, वह 1984 के दंगों पर एकबार फिर उन्हें लहुलूहान कर गया था। 84 के दंगे यह बताने को काफी थे कि सिख समाज को कितना अकेला और विवश छोड़ दिया गया है। हालांकि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या को जायज ठहराया गया था, ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने पंजाब में आतंकवाद की कमर तोडऩे के लिए ऐसी ठोस कार्रवाई की, जोकि अगर अमल में नहीं लाई जाती तो आज के पंजाब की ऐसी सूरत नहीं होनी थी। ऐसे में श्रीमती इंदिरा गांधी ने जो किया, वह एक प्रशासक और राजनीतिक के रूप में उचित था, लेकिन उसके बाद उनके साथ जो किया गया, वह उचित कैसे ठहराया जा सकता है।

 

ऑपरेशन ब्लू स्टार ऐसा कृत्य है, जिसे न चाहते हुए भी तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को अंजाम देना पड़ा था। क्या एक देश में, एक राज्य में ऐसी ताकतों को सिर उठाने की इजाजत मिलनी चाहिए जोकि सर्व समाज के लिए समस्या बन रही हों। पंजाब में खालिस्तान की आग, दावानल बन चुकी थी और उसे बुझाने के लिए ऐसा कुछ किया जाना जरूरी हो गया था। यह भी तो एक सच है कि खालिस्तानी आतंकियों ने धर्म की आड़ ली, उन्होंने गुरुघर को अपना ठिकाना बनाया और उसके पीछे से वार किए। अगर उनमें इतना साहस था और वे देश की सरकार से टकराने का मूड रखते थे तो गुरुघरों से बाहर आकर अपने कृत्यों को अंजाम देते।

 

बावजूद इसके श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या के बाद एक पार्टी विशेष के लोगों ने जिस प्रकार से समाज में आतंक को फैलाया और सिख समाज के लोगों पर रह-रहकर वार किए, उससे कानून की स्थिति की पोल खुल गई। किसी के बुरे कृत्यों के लिए पूरे समाज को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। वास्तव में सिख विरोधी दंगों के दोषियों को सजा मिलना जरूरी है, लेकिन यह कैसे होगा, यह सबसे बड़ा राज है। राजनीतिक दलों ने इस मामले को लेकर जिस प्रकार अपने फायदे की रोटियां सेकी हैं, वह भी दुर्भाग्यपूर्ण है। आखिर महात्मा गांधी का सत्य से सरोकार का वह मंत्र कहां गया, अपराधी अपराध करके भी निर्दोष है और निर्दोष अपराधी हो गया है।

Have something to say? Post your comment

और राष्ट्रीय खबरें

punjab university छात्र संघ चुनाव में लगातार दूसरी बार ABVP की जीत के मायने चकित करते हैं

punjab university छात्र संघ चुनाव में लगातार दूसरी बार ABVP की जीत के मायने चकित करते हैं

नेता विपक्ष राहुल गांधी को क्या दलित होने की पीड़ा का पता है? क्या दलितों पर राजनीति कभी बंद होगी

नेता विपक्ष राहुल गांधी को क्या दलित होने की पीड़ा का पता है? क्या दलितों पर राजनीति कभी बंद होगी

क्या सच में मनुस्मृति एक पिंजड़ा है, जिसे तोड़ने का आह्वान राहुल गांधी कर रहे हैं

क्या सच में मनुस्मृति एक पिंजड़ा है, जिसे तोड़ने का आह्वान राहुल गांधी कर रहे हैं

राजस्थान सरकार के ​शिक्षा मंत्री बताएंगे कि ग्रामीणों ने बचा क्या लिया - टीन की छत के नीचे चल रहे एक तबेले वाले स्कूल को, क्या ऐसे स्कूलों से ही हम वि​कसित बनेंगे

राजस्थान सरकार के ​शिक्षा मंत्री बताएंगे कि ग्रामीणों ने बचा क्या लिया - टीन की छत के नीचे चल रहे एक तबेले वाले स्कूल को, क्या ऐसे स्कूलों से ही हम वि​कसित बनेंगे

'आ​खिर माहौल को सुधारने' के लिए पूर्व पीएम शेख हसीना की वापसी पर ही क्यों अड़ा है बांग्लादेश

'आ​खिर माहौल को सुधारने' के लिए पूर्व पीएम शेख हसीना की वापसी पर ही क्यों अड़ा है बांग्लादेश

young india : देश की युवा शक्ति को अपनी ताकत का हो चुका अहसास, 2 करोड़ से अ​धिक युवा मतदाता ही अब बनेंगे भाग्यविधाता

young india : देश की युवा शक्ति को अपनी ताकत का हो चुका अहसास, 2 करोड़ से अ​धिक युवा मतदाता ही अब बनेंगे भाग्यविधाता

परिवर्तन के 12 वर्ष : प्रधानमंत्री मोदी ने दिया ब्योरा, बीते 12 वर्षों में देश ने वि​भिन्न क्षेत्रों में कितनी की है प्रगति   

परिवर्तन के 12 वर्ष : प्रधानमंत्री मोदी ने दिया ब्योरा, बीते 12 वर्षों में देश ने वि​भिन्न क्षेत्रों में कितनी की है प्रगति  

'रक्षा शक्ति' विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की कुंजी : PM नरेंद्र मोदी

'रक्षा शक्ति' विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की कुंजी : PM नरेंद्र मोदी

पाकिस्तान के रक्षा बजट पर अमेरिकी रिपोर्ट में उठे सवालों का जवाब जनता को ही मांगना चा​हिए

पाकिस्तान के रक्षा बजट पर अमेरिकी रिपोर्ट में उठे सवालों का जवाब जनता को ही मांगना चा​हिए

कांग्रेस को इस समय खुद को 'पीजीआई' पहुंचने से रोकने की जरूरत है, 'घर' पर ही चिकित्सा कर ले गनीमत होगी

कांग्रेस को इस समय खुद को 'पीजीआई' पहुंचने से रोकने की जरूरत है, 'घर' पर ही चिकित्सा कर ले गनीमत होगी