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राष्ट्रीय

young india : देश की युवा शक्ति को अपनी ताकत का हो चुका अहसास, 2 करोड़ से अ​धिक युवा मतदाता ही अब बनेंगे भाग्यविधाता

सोशल मी​डिया पर अपनी मजबूत पकड़, देश से जुड़े मुद्दों की व्यापक समझ, कम समय में प​रिणाम की चाहत युवाओं के मंत्र। हालांकि युवाओं से कर्तव्य, नियमों के पालन की भी हो रही अपेक्षा

16 अगस्त, 2026 02:02 PM
YOURTH POWER : ​ दिल्ली में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद युवाओं के संबंध में यह साफ हो गया है कि वे ही देश को आगे लेकर जाएंगे। फोटो एआई

youth power in india :  नई दिल्ली : नीट पेपर लीक के मामले को लेकर बीते माह देश की राजधानी नई दिल्ली में युवाओं के बेहद आक्रोशित आंदोलन ने तमाम सवाल खड़े कर दिए हैं। इस आंदोलन को केंद्र की भाजपा सरकार ने आरंभ में बहुत हल्के में लिया और सरकार अपने आकार और प्रकार के अनुरूप आगे बढ़ती रही। यह भी देखने को मिला कि आंदोलनकारी युवाओं जोकि सीजेपी यानी क्रॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में सक्रिय थे, से सरकार की ओर से बातचीत की कोई कोशिश नहीं की गई। हालांकि इसके बाद संसद की तरफ कूच करने के दौरान आंदोलन ने जैसा रूप लिया, उसके बाद केंद्र सरकार को भी युवाओं के समक्ष नतमस्तक होना पड़ा।

 

दरअसल, अब यह तय हो चुका है कि देश का आज और कल युवाओं के हाथ में है और सरकारों को अब युवाओं के मद्देनजर रखकर ही योजनाओं को बनाना और लागू करना होगा। यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में युवाओं के संदर्भ में योजनाओं की घोषणा की।

आज भारत की राजनीति को युवा कई महत्वपूर्ण तरीकों से प्रभावित कर रहे हैं। अब युवा केवल मतदाता नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस, आंदोलनों और नीति-निर्माण को प्रभावित करने वाली सक्रिय शक्ति बन रहे हैं। जानते हैं, आखिर देश में युवा अपनी मौजूदगी का अहसास किस प्रकार करवा रहे हैं।

 

 

 

मतदान के माध्यम से

2024 के लोकसभा चुनाव से पहले 18–29 वर्ष के 2 करोड़ से अधिक युवा मतदाता मतदाता सूची में जोड़े गए। कुल मतदाताओं में 18–29 आयु वर्ग की हिस्सेदारी 22.78% थी।

 

सोशल मीडिया के जरिए

युवा Instagram, YouTube, X और अन्य डिजिटल माध्यमों पर राजनीतिक विचारों, मुद्दों और अभियानों को तेजी से फैलाते हैं। चुनाव आयोग ने भी 2024 में युवाओं और पहली बार मतदान करने वालों तक पहुँचने के लिए सोशल मीडिया अभियानों का इस्तेमाल किया।

 

रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देकर

बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाएँ, शिक्षा, महँगाई और कौशल विकास जैसे मुद्दे युवाओं के राजनीतिक निर्णयों को प्रभावित करते हैं। 2024 के एक अध्ययन में पाया गया कि किसी एक दल को युवाओं का समर्थन निर्णायक रूप से नहीं मिला, यानी युवा मतदाताओं की पसंद अधिक विविध रही।

 

आंदोलनों और छात्र राजनीति के माध्यम से

 युवा छात्र संगठनों, सामाजिक आंदोलनों और स्थानीय अभियानों में भाग लेकर सरकारों पर दबाव बनाते हैं। इससे राजनीतिक दलों को युवाओं की मांगों और समस्याओं पर प्रतिक्रिया देनी पड़ती है।

 

राजनीतिक दलों की रणनीति बदलकर

 बड़ी युवा आबादी के कारण राजनीतिक दल युवाओं को आकर्षित करने के लिए रोजगार, स्टार्टअप, शिक्षा, डिजिटल अवसर और कौशल विकास जैसे मुद्दों पर अधिक जोर देते हैं। 2024 में युवा वर्ग प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण वोट-ब्लॉक था।

 

राजनीति में सीधे प्रवेश करके

 युवा केवल वोट देने तक सीमित नहीं हैं; वे छात्र राजनीति, स्थानीय निकायों, राजनीतिक दलों के युवा संगठनों और चुनाव अभियानों के माध्यम से नेतृत्व की भूमिका में भी आ रहे हैं।

 

युवाओं को देने होंगे वास्तविक अवसर 

जाहिर है, देश की राजनीति में युवाओं का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी संख्या, डिजिटल पहुँच, नए मुद्दों के प्रति जागरूकता और राजनीतिक भागीदारी है। हालांकि, युवाओं की राजनीतिक भागीदारी को और मजबूत करने के लिए राजनीतिक दलों को उन्हें केवल चुनावी वोट-बैंक के रूप में देखने के बजाय निर्णय-निर्माण और नेतृत्व में वास्तविक अवसर देने होंगे। बहरहाल, यह भी जरूरी है कि युवा सिर्फ लेने के लिए नहीं अपितु देने के लिए आगे आएं।

 

इसका अभिप्राय यह है कि देश हमेशा बलिदान, त्याग और संघर्ष मांगता है। आज युवा लगता है कि केवल अपने लिए सुविधाएं ही मांग रहा है। हालांकि देश के प्रति प्रतिबद्धता, अपने कर्तव्य और नियमों का भान भी उसे होना चाहिए। जंतर-मंतर पर युवाओं का प्रदर्शन आलोचना की नजर से भी देखा गया, जिसमें उनकी ओर से उठाए गए मुद्दों के बजाय इस आंदोलन में प्रयोग किए अभद्र तरीके और संवाद की शैली को गंभीरतम पाया गया।

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