Indo-Bangladesh relations : भारत-बांग्ला देश के संबंधों को पटरी पर लाने के लिए भारत ने प्रधानमंत्री तारिक अनवर सरकार के साथ जिस प्रकार का सामंजस्य बैठाने की कोशिशें की हैं, उसके उलट बांग्लादेश सरकार की ओर से जैसी हठधर्मिता अपनाई जा रही है, वह दोनों पड़ोसी देशों के लिए उपयुक्त नहीं है।
बांग्लादेश सरकार की ओर से अब प्रधानमंत्री तारिक अनवर की भारत यात्रा को एक टूल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसके तहत पहले पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना जोकि बीते दो साल से भारत में शरण लिए हुए हैं, को वापस भेजने की मांग पूरी होने के बाद ही प्रधानमंत्री अनवर भारत का रूख करेंगे। दरअसल, बीते दो वर्षों से भारत-बांग्लादेश के संबंधों में जिस प्रकार की कटुता दिख रही है, वह बांग्लादेश के संदर्भ में स्वाभाविक नहीं अपितु कहीं पर निर्मित प्रतीत हो रही है।
ब्रिक्स सम्मेलन के लिए रहमान को दिया है आमंत्रण
बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय की ओर से एक बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री रहमान की नई दिल्ली यात्रा से पहले भारत को अनुकूल माहौल बनाना होगा। माहौल को अनुकूल बनाने से उनका मतलब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण से है। दरअसल, सितंबर में नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों के सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री तारिक रहमान को आमंत्रित किया गया है। जाहिर है, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस वर्ष दिसंबर तक खुद बांग्लादेश लौटने की घोषणा की है, लेकिन बावजूद इसके रहमान सरकार ने दोनों देशों के बीच व्यापक हितों को पीछे धकेलते हुए शेख हसीना मामले को सर्वोपरि रखा है, जोकि परिपक्व विदेश नीति के मुताबिक नहीं जान पड़ रहा। संभव है कि बांग्लादेश की नई सरकार किन्हीं देशों के दबाव में काम कर रही है और वे देश भारत के साथ उसके संबंधों को सुधरने नहीं देना चाहते।
बड़े बदलावों से गुजर रही बांग्लादेश की राजनीति
बांग्लादेश की राजनीति पिछले दो वर्षों में बड़े बदलावों से गुज़री है। अगस्त 2024 में छात्र-नेतृत्व वाले व्यापक आंदोलन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता छोड़कर भारत आना पड़ा। इसके बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी। फरवरी 2026 के आम चुनाव के बाद यह अंतरिम व्यवस्था समाप्त हुई और तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की सरकार सत्ता में आई।
मौजूदा सरकार: तारिक रहमान के सामने चुनौतियाँ
तारिक रहमान ने फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री पद संभाला। उनकी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक स्थिरता स्थापित करना, अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और 2024 के राजनीतिक संकट के बाद संस्थाओं में जनता का विश्वास बहाल करना है।
नई सरकार के लिए भारत के साथ संबंध भी महत्वपूर्ण हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, सीमा प्रबंधन, जल-विवाद और सुरक्षा जैसे मुद्दों के साथ-साथ शेख हसीना की भारत में मौजूदगी से जुड़ा प्रत्यर्पण विवाद भी संबंधों को प्रभावित कर रहा है। हाल में ढाका ने भारत के साथ संबंधों को बेहतर बनाने के लिए अनुकूल राजनयिक वातावरण की आवश्यकता पर जोर दिया है।
शेख हसीना की राजनीतिक विरासत
शेख हसीना ने 1996-2001 और फिर 2009-2024 तक बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के रूप में काम किया। उनके लंबे शासनकाल में बांग्लादेश ने आर्थिक विकास, बुनियादी ढाँचे और क्षेत्रीय संपर्क के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की। भारत-बांग्लादेश संबंधों में भी उनके कार्यकाल के दौरान सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा और संपर्क के क्षेत्र में व्यापक सहयोग हुआ।
लेकिन उनके शासन को लेकर लोकतांत्रिक संस्थाओं, विपक्ष के दमन और मानवाधिकारों से जुड़े गंभीर आरोप भी उठते रहे। 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान सरकार की कार्रवाई ने राजनीतिक संकट को निर्णायक मोड़ दिया। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने उस समय की हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने की बात कही थी। हसीना इन आरोपों और उनके विरुद्ध लगाए गए मामलों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताती रही हैं।
वर्तमान में शेख हसीना की स्थिति
शेख हसीना अगस्त 2024 से भारत में रह रही हैं। 2025 में बांग्लादेश की एक अदालत ने उन्हें उनकी अनुपस्थिति में मृत्युदंड सुनाया; बांग्लादेश सरकार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रही है। भारत ने प्रत्यर्पण अनुरोध प्राप्त होने की पुष्टि की है और कहा है कि वह इसे अपने कानूनी ढाँचे के अनुसार देख रहा है।
अगस्त 2026 में हसीना ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की योजना रखती हैं। उन्होंने अपनी पार्टी अवामी लीग पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग भी की है। यदि वह लौटती हैं, तो यह बांग्लादेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण नया घटनाक्रम होगा और वर्तमान सरकार के सामने नई राजनीतिक तथा कानूनी चुनौतियाँ पैदा कर सकता है।
भारत के लिए इसका महत्व
बांग्लादेश भारत का महत्वपूर्ण पड़ोसी है। दोनों देशों की लंबी सीमा, पूर्वोत्तर भारत से संपर्क, व्यापार, नदियाँ, ऊर्जा और सुरक्षा हित एक-दूसरे से जुड़े हैं। इसलिए ढाका में राजनीतिक परिवर्तन का सीधा असर नई दिल्ली पर भी पड़ता है।
शेख हसीना के भारत में रहने और उनके प्रत्यर्पण की बांग्लादेशी मांग ने भारत-बांग्लादेश संबंधों को संवेदनशील बना दिया है। दूसरी ओर, भारत के लिए बांग्लादेश के साथ दीर्घकालीन और व्यावहारिक संबंध बनाए रखना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।